ek dhurt mendak – jaisi karni waisi bharni – एक चूहा और धूर्त मेंढक

ek dhurt mendak – jaisi karni waisi bharni – एक चूहा और धूर्त मेंढक

ek dhurt mendak – jaisi karni waisi bharni – एक चूहा और धूर्त मेंढक

 

 

 

 

 

 

 

दोस्तों आज जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूं वह एक धूर्त मेंढक की है तो कहानी इस प्रकार है एक मेंढक होता है और एक चूहा होता है दोनों में गहरी दोस्ती होती है एक दिन चूहा मेंढक से बोलता है हम दोनों कितने अच्छे दोस्त हैं और यह दोस्ती हम हमेशा निभाएंगे ! चूहा आगे बोलता है क्यू ना हम साथ साथ रहे और आगे का जीवन एक साथ व्यतीत करे इस  पर मेंढक बोलता है हां जरूर, हम पक्के दोस्त हैं और एक साथ ही रहेंगे इस पर चूहा एक रस्सी उठाकर बोलता है ये रस्सी को मैं अपनी पूछ से बाँध लेता हु और तुम अपने पैरों में बांध लो इसे हम दोनों साथ ही रहेंगे हमेशा ! इस पर मेंढक चूहे की बात मान लेता है वह दोनों एक साथ रहने लगते हैं क्योंकि मेंढक धूर्त होता है तो वह चूहे को परेशान करने के लिए एक तरकीब सोचता है और थोड़ी देर में जानबूझकर पानी में गिर जाता है और मेंढक के साथ बंधा होने के कारन चूहा भी उसके साथ-साथ पानी में गिर जाता है मेंढक यह देखकर मन ही मन बहुत खुश होता है जबकि चूहा जैसे ही पानी में गिरता है वह उसे सांस लेने में परेशानी होती है उसका दम घुटने लगता है चूहे को तकलीफ मैं देख मेंढक बहुत ही खुश होता है चूहा किसी तरह पानी में से निकलने के लिए तड़पता है जैसे तैसे नदी के किनारे तक पहुंच जाता है क्योंकि चूहा मेंढक के साथ बंधा होता है इसलिए मेंढक भी पानी से बाहर आ जाता है दोनों के जमीन पर आते ही कुछ दूर जमीन पर चलते ही दूर आसमान में चील की नजर चूहे पर पड़ जाती है और वो चूहे को पकड़ने के लिए जमीन पर आती है और चूहे को झपटा मर कर पाकर लेती है और अपने साथ उसे आसमान में ले जाती है क्योंकि मेंढक भी चूहे के साथ बंधा होता है इसलिए वह भी चूहे के साथ आसमान में उड़ जाता है और इस तरह से चील  दोनों चूहे को और मेंढक को खा जाती है इस तरह से मेंढक चूहे के साथ बेमौत ही मारा जाता है दोस्तों यह कहानी यहीं खत्म होती है कहानी का तात्पर्य यह है की अगर हम किसी के बारे में बुरा सोचते हैं तो हमारा खुद का भी बुरा होता है इसलिए कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए

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